मीना कुमारी की जीवनी | Meena Kumari Biography in Hindi

Meena Kumari Biography in Hindi

मीना कुमारी एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री, गायक और कवि थी। भारतीय फिल्म आलोचकों ने मीना कुमारी को हिंदी सिनेमा के “ऐतिहासिक रूप से अतुलनीय” अभिनेत्री के रूप में माना।। अपने शुरुआती करियर में, मीना कुमारी साहिब बीबी और गुलाम, पकेज़ा, मेरी अपन, आरती, बैजू बावरा, परिणीता, दिल अपन और प्रीति पारै, फुट पाथ, दिल एक मंदिर और काजल जैसे 92 फिल्मों में अभिनय किया।

मीना कुमारी को “द ट्रेजडी क्वीन” के नाम से भी जाना जाता है और जिन्हें अक्सर भारतीय फिल्मों के सिंड्रेला को बुलाते थे। भारतीय फिल्म में मीना कुमारी को हिंदी सिनेमा के “ऐतिहासिक रूप से अतुलनीय” अभिनेत्री के रूप में माना जाता हैं।मीना कुमारी बला की खूबसूरत थीं जिनकी खूबसूरती पर सारा जमाना फिदा था, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक ना होने की वजह से उन्हें मात्र चार साल की उम्र से ही काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

फिल्मों में काम करने से पहले मीना कुमारी हिंदी के धार्मिक शोज में काम करतीं थीं जहां उन्हें हमेशा ही देवी का रोल प्ले करने के लिए मिलता। इसके बाद मीना की एंट्री फिल्मों में हुई और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।मीना ने 7 वर्ष की आयु में अभिनय की शुरुआत की, जिसमें फरजांडा वतन के बाल कलाकार के रूप में उन्होंने फिल्म में जयराज सिंह की बेटी की भूमिका निभाई।

मीना कुमारी का असली नाम मेहाजबीन नाज था। फरजांडा वतन, विजय भट्ट के निर्देशक ने अपनी फिल्म के लिए मेहाजबीन  नाम बदलकर मीना कर दिया। एक बार जब वह बड़ी हो गई, तो वह मीना कुमारी के रूप में लोकप्रिय हो गईं।मीना कुमारी की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं थी, लेकिन वह काफी उर्दू और हिंदी में निपुण थी। मीना कुमारी एक उत्साही पाठक थी। वह भी उर्दू में कविताएं लिखती थी, जिनमें से कई भी प्रकाशित हुए।

मीना कुमारी की दादी, हेम सुंदरी ठाकुर (टैगोर) रबींद्रनाथ टैगोर के छोटे भाई की बेटी थीं। उसके पति के मरने के बाद, वह मेरठ के लिए रवाना हो गई, एक नर्स बन गई, पारेलाल शंकर मेरुति नामक एक ईसाई से शादी कर ली, जो एक उर्दू पत्रकार था और ईसाई धर्म को गले लगा लिया। हेम सुन्दी की दो बेटियां थीं; उनमें से एक प्रभावाती थी, मीना कुमारी की मां ।

Early Life- (प्रारंभिक जीवन)

मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1 9 33 को हुआ था।मीना कुमारी के पिता का नाम अली बक्स था ,जब मीना कुमारी का जन्म हुआ तो उसके पिता मीना कुमारी  के जन्म से खुश नहीं थे। मीना कुमारी की  मां का नाम इक्बाल बेगम था।मीना कुमारी का असली नाम महजबीं बानो था और ये बंबई में पैदा हुई थीं।

मीना कुमारी की बड़ी बहन खुर्शीद बानो भी फिल्म अभिनेत्री थीं जो आज़ादी के बाद पाकिस्तान चलीं गईं। मीना कुमारी पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसकी पारिवारिक स्थिति ऐसी थी कि उनके पास कैरियर के रूप में अभिनय करने के लिए कोई रास्ता नहीं था । “लेदरफेस” (1939) उनकी पहली फिल्म थी, जिसे विजय भट्ट ने प्रकाश स्टूडियो के लिए निर्देशित किया था। हालांकि, फिल्म ‘बैजू बावरा’ थी, जिससे उन्हें प्रशंसा मिली।

एक बार मीना अपनी बहन के साथ महाबलेश्वर से लौट रही थीं। रास्ते में उनकी कार का जोरदार एक्सीडेंट हुआ। मीना का एक हाथ बुरी तरह घायल हो गया। ये भी बात थी कि हाथ शायद काटना पड़े। लेकिन हाथ बच गया लेकिन उनकी दो अंगुलियां काटनी पड़ी। अपने पूरे करियर में उन्होंने किसी फिल्म में दर्शकों को पता नहीं लगने दिया कि उनकी दो अंगुलियां नहीं हैं। वे खुद को ऐसे कैरी करती थीं और इतनी खूबसूरती से मूव करती थीं कि वो हाथ सामने होते हुए भी सबकुछ परफेक्ट लगता था।

Career (व्यवसाय)

 

मीना कुमारी बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री में से एक थीं। अपने कैरियर के दौरान, उन्होंने नब्बे फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें से कई ने आज क्लासिक और पंथ का दर्जा हासिल किया है।मीना कुमारी यानी महजबीन ने 7 वर्ष की उम्र में अपने अभिनय करियर की शुरूआत की थी, उन्हें बेबी मीना नाम दिया गया था।

अपने दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली कुछ एक्ट्रेस में मीना कुमारी आती हैं। 1940 के बाद के दौर में वे एक फिल्म के लिए 10,000 रुपए की मोटी फीस लेती थीं। बाद के वर्षों में वे बहुत बड़ी स्टार बन गईं और उनकी फीस समय के साथ और मोटी हो गई। उनकी ऊंची फीस के बावजूद अपनी फिल्में ऑफर करने और रोल सुनाने के लिए प्रोड्यूसर्स उनके घर के बाहर लाइन लगाते थे।

महजबीं पहली बार 1939 में फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म फ़रज़न्द-ए-वतन में बेबी महज़बीं के रूप में नज़र आईं। 1940 की फिल्म “एक ही भूल” में विजय भट्ट  ने इनका नाम बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया। 1946 में आई फिल्म बच्चों का खेल से बेबी मीना 14 वर्ष की आयु में मीना कुमारी बनीं। मार्च 1947 में लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण उनकी माँ की मृत्यु हो गई। मीना कुमारी की प्रारंभिक फिल्में ज्यादातर पौराणिक कथाओं पर आधारित थीं जिनमें हनुमान पाताल विजय, वीर लाजोत्कटच व श्री गणेश महिमा प्रमुख हैं।

1952 में आई फिल्म बैजू बावरा ने मीना कुमारी के फिल्मी सफ़र को नई उड़ान दी। मीना कुमारी द्वारा चित्रित गौरी के किरदार ने उन्हें घर-घर में प्रसिद्धि दिलाई। फिल्म 100 हफ्तों तक परदे पर रही और 1954 में उन्हें इसके लिए पहले फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।1953 तक मीना कुमारी की तीन फिल्में आ चुकी थीं जिनमें : दायरा, दो बीघा जमीन  और परिणीता शामिल थीं।

परिणीता से मीना कुमारी के लिये एक नया युग शुरु हुआ। परिणीता में उनकी भूमिका ने भारतीय महिलाओं को खास प्रभावित किया था चूँकि इस फिल्म में भारतीय नारी की आम जिंदगी की कठिनाइयों का चित्रण करने की कोशिश की गयी थी। उनके अभिनय की खास शैली और मोहक आवाज़ का जादू छाया रहा और लगातार दूसरी बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।

‘एक ही रास्ता’ – एक परिवार-नाटक भारतीय हिंदी फिल्म थी जिसे बी आर चोपड़ा द्वारा निर्देशित और निर्मित किया गया था। यह नवागंतुक सुनील दत्त, अशोक कुमार और डेज़ी ईरानी के साथ मीना कुमारी ने  अभिनय किया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई और 25 हफ्तों से अधिक समय तक प्रदर्शित हुई, जो “जुबली हिट” थी।  बंधन – लोकप्रिय बंगाली उपन्यास मंत्र शक्ति के आधार पर, हेमचंद्र चंदर द्वारा निर्देशित, मीना कुमारी और प्रदीप कुमार की अगुवाई की और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्टिफिकेट मेरिट से सम्मानित किया गया।

आजाद में – श्रीरामू नायडू एसएम द्वारा निर्देशित। यह उस वर्ष की सबसे बड़ी कमाई वाली हिंदी फिल्म थी।

मीना कुमारी को फिल्मी करियर में बेहद सफलता मिलने के बाद भी कभी प्रेम नहीं मिल पाया और तन्हाई से लड़ती रहीं।मीना कुमारी मशहूर फिल्मकार कमाल अमरोही के साथ अपने असफल रिश्ते और तब के संघर्षशील अभिनेता धर्मेंद्र के साथ अपने अधूरे प्रेम संबंध की वज़ह से भी हमेशा चर्चा में रहीं।

मीना कुमारी, उसने इन फिल्मों से गाने के लिए अपनी आवाज़ दी-दुनिया एक सराय से तीन गाने (1 9 46),पिया घर आजा से पांच गाने (1 9 47),बिछेद बालम (1 9 48) से छह गीत,पिंजरे के पंथी (1 9 66)

Award (पुरस्कार)

मीना कुमारी ने कई पुरस्कार जीते हैं उनके कुछ पुरस्कार नीचे दिए गए हैं-

बैजू बावरा 1954

परिणीता 1955

साहिब बीवी और गुलाम 1960

काजल 1966

Death (मौत)

मीना कुमारी  28 मार्च 1 9 72 को गंभीर रूप से बीमार  थीं , उन्हें सेंट एलिजाबेथ नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मीना कुमारी की मृत्यु 31 मार्च 1 9 72 को ” लिवर सिरोसिस ” के कारण हुई थीं ।पति कमल अमरोही की इच्छा के अनुसार, उसे नरियालावाड़ी, माझगांव, मुंबई में स्थित, रहमाबाद कब्रस्तान में दफनाया गया था । कमल अमरोही की मृत्यु 11 फरवरी 1993 को मुंबई में हुई थी उसकी इच्छा मीना कुमारी की कब्र के पास दफनाया गया था।

Muskan

मुस्कान इंडियन दिलवाले टीम की यूट्यूब टीम की हेड हैं। इन्हे बॉलीवुड से संबंधित लेख लिखना अच्छा लगता हैं। इन्हे लिखने के साथ एक्टिंग का भी हुनर हैं।

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