दुष्यंत कुमार का जीवन परिचय | Dushyant Kumar Biography in hindi

दुष्यंत कुमार

आधुनिक हिंदी कवि दुष्यंत कुमार जी भारतीय साहित्य के विख्यात कविभूषण और ग़ज़ल लेखक थे जिन्होंने समाज के पहलु, सामाजिक विषयों और प्रकृति के विभिन्न रूपों को आधार मानकर अपनी कविताओं की रचना की। दुष्यंत कुमार जी ने २०वीं दशक की पीढ़ी तक अपनी मानवता के प्रति और पर्यावरण के भिन्न भिन्न रंगों के माध्यम से अपने प्रेम को सामान्य जन तक पहुंचाया ही नहीं वरन उसके प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा स्रोत भी बने।

शुरुआती दौर
आधुनिक कवि दुष्यंत कुमार जी का जन्म एक सितम्बर १९१३, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नवादा गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था। शुरू के दिनों में दुष्यंत कुमार जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद कुछ दिनों तक भोपाल के आकाशवाणी में बतौर सह निर्माता काम किया। उसी दौरान दुष्यंत जी ने कवितायेँ, गाने, ग़ज़ल, काव्य नाटक, काव्य कथा आदि सभी विधाओं में लेखन का कार्य किया परन्तु उनकी हिंदी ग़ज़लों की अपार लोकप्रियता ने सभी विधाओं को हाईड कर दिया।

साहित्यिक पथ
दुष्यंत कुमार अपने निजी जीवन में मस्तमौला थे। ३० दिसंबर १९७५ में जब वे सह निर्माता के पद से ऊपर निर्माता के पद पर जाने वाले थे तभी दुष्यंत कुमार का भोपाल में निधन हो गया। जब साहित्य की विशाल संसार में दुष्यंत जी ने प्रवेश किया था वहां पर पहले से बहुत से हिंदी के कविओं की पहचान चरम पर थी जिनमें दो प्रगतिशील कवि मुख्य रूप से अपना परचम लहरा रहे थे। एक थे ‘मुक्तिबोध’ और दूसरे थे ‘अज्ञेय’ जिन्होंने अपनी कल्पनाओं को कविता के माध्यम से साकार रूप दिया था। ऐसे में दुष्यंत कुमार जी ने अपनी अद्भुत रचना शक्ति से कविओं में अपनी घुसपैठ की और अपनी जगह पक्की कर कवि बनाम परचम लहरा दिया था। उन्होंने महज ४० वर्ष में कवि और ग़ज़लकार के रूप में बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की।

हिंदी साहित्य के सितारे दुष्यंत जी जो आसमान में सबसे तेज़ टिमटिमाने वाले तारें हैं जिन्हें चाँद के साथ सदैव टिमटिमाने का वरदान मिला है। समकालीन हिंदी गजल के क्षेत्र में जो उपलब्धि और प्रसिद्धि दुष्यंत जी को मिली है वो बहुत वर्षों में किसी एक को ही मिलती है। दुष्यंत कुमार जी एक ऐसे कवि हैं जो जाने के बाद भी अमर हैं अपनी ही ग़ज़लों में और हिंदी कविताओं में और सदैव अमर रहेंगें अनंत काल तक। दुष्यंत जी की साहित्यिक छवि जिस मुकाम तक है वो चिर निरंतर बानी रहेगी। देश और समाज के विषयों के अलावा दुष्यंत जी ने प्रेम के विषयों पर भी ग़ज़लों की रचना कर अपनी भावनाओं को उजागर किया है।

दुष्यंत कुमार की कविताओं की सन्दर्भ सूचि-
१. हो गई है पीर पर्वत सी
२. सूर्य का स्वागत
३. अब तो पथ यही है
४. सूर्यास्त : एक डिप्रेशन
५. मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आयेंगें
६. मापदंड बदलो
७. गीता का जन्म
८. सूचना
९. आज सड़कों पर
१०. इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है
११. गाँधी जी का जन्मदिवस
१२. कहाँ तो तय था चारंगा हर एक घर के लिए
१३. बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं
१४. अपाहिज व्यथा
१५. इनसे मिलिए
१६. सूना घर
१७. एक आशीर्वाद
१८. धर्म
१९. मेरी कुंठा
२०. तुलना
२१. यह क्यों
२२. घंटियों की आवाज़ कानों तक पहुंचती है
३२. मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ
२४. तीन दोस्त
२५. आग जलती रहे
२६. फिर कर कर लेने दो प्यार प्रिये
२७. विदा के बाद प्रतीक्षा
२८. मत कहो आकाश में कोहरा घाना है
२९. कौन आया था
३०. एक कबूतर चिट्ठी लेकर पहली

दुष्यंत कुमार कविता संग्रह –
१. जलते हुए वन का बसंत
२. आवाज़ों के घेरे
३. सूर्य का स्वागत

दुष्यंत कुमार ग़ज़ल संग्रह सूची
साये में धूप

दुष्यंत कुमार काव्य नाटिका

एक कंठ विषपायी

आभा सिंह इंडियन दिलवाले की सबसे पहले जुड़ने वाली कंटेंट राइटर हैं। सामाजिक मुददों और कहानी लिखने में इनकी रूचि हैं।

divineabha

आभा सिंह इंडियन दिलवाले की सबसे पहले जुड़ने वाली कंटेंट राइटर हैं। सामाजिक मुददों और कहानी लिखने में इनकी रूचि हैं।

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