Dilwale movie | दिलवाले फिल्म

 

दिलवाले फिल्म , यह एक रोमांटिक फिल्म थी । यह फिल्म 1994 में बनायी गयी थी. यह पूरी तरह से एक रोमांस से भरपूर थी । इस फिल्म को नदिम- सरवन ने अपने संगीत मय संगीत से सजाया था । इस फिल्म की कहानी ऐसी थी मानो दिल को छू जाये औऱ पूरी तरह इसांन इस में डूब जाये और कम से कम फिल्म देखते वक्त ये एहसास मन में बन रहे कि वास्तव में प्यार करने वाले इस दुनिया में क्या- क्या मिशाल पेश कर सकते है

कलाकार-इस फिल्म में अजय देवगन,सुनील शेट्टी, रवीना टंडन मु्ख्य किरदार में थे। शायद ही आपको लोगो को पता होगा की सपना रोल को लिए पहले दिव्य भारती को कास्ट किया गया था पर कुछ कारणो की वजह से आखिरी में रवीन टंडन को कास्ट कर लिया गया।

इस फिल्म  को डायेक्ट हैरी बवेजा न और प्रड्यूज किया परमजीत बवेजा और इसकी कहानी लिखी है करन राजदान जो एक प्रसिद्ध लेखक है। औऱ इस फिल्म को नदीम-सरवन ने अपने संगीत का जादू बिखेरा था।

यह फिल्म 4 फरवरी 1994 को भारत में  रिलिज की गयी थी। यह 165 मिनट की थी और इसका बजट 2 करोड़ रुपये थी और बाक्स आफिस पर समय के हिसाब से शानदार कमाई  की थी। उस समय 12 करोड़ रुपये कमाने किसी फिल्म के लिए बहुत बड़ी बात होती   थी जो इस फिल्म ने कर दिखाया था ।

कहानी-इस फिल्म की कहानी कुछ इस तरह है कि इस फिल्म की शुरुआत एक मेंटल एसायलम  मरीज से होती है जो है अजय देवगन। उसका बरताव सभी मेंटल रोगियो से एकदम अलग होता है।

अरुण हास्पिटस से भागना चाहत है लेकिन आखिरी वक्त डाक्टर आकर अरुण को रोक लेते हैं। अरुण यानी अजय देवगन की माँ रीमा लागू वह हमेशा अपने बेटे की अच्छे होने के लिये मंदिर जाती है और भगवान से उसके ठीक होने की दुआ मांगती है । और इस फिल्म में सुनील शेट्टी की इंट्री होती है और वह अरुण के केस का चार्ज लेता है । पहले विक्रम यानी सुनील शेट्टी इस केस को लेने से मना कर देता है पर एक बार अरुण से मिलने के बाद उसका मन बदल जाता है और वह इस केस को अपने हाथों मे ले लेता है और यहाँ से इस फिल्म की शुरुआत होती है।

और आगे कहानी में पता चलता है कि अरुण किसी सपना (रवीना टंडन) नाम की लड़की से प्यार करता था और यही कारण है उसके मेंटल होने का।और विक्रम सोचता है कि कैसे एक आदमी अरुण  मार्डर कर सकता है और वह उसके बाद अरुण की माँ के पास जाता है और यहाँ से कहानी फ्लैशबैक में जाती है। इसमें अरुण बहुत ही खुश मिजाज किस्म का लड़का होता है और वह अपनी जीवन को बहुत ही अच्छी तरह से खुशी खुशी जीता है और एक  दिन काँलेज दोस्तो  की जन्मदिन की पार्टी में शामिल होता है वहाँ उसकी नजर सपना पर पड़ती है और वह उसके प्यार में पड़ जाता है।

इस कहानी मे सपना के चाचा मामा ठाकुर यानि परेश रावेल है जो 20 सालों से सपना की देखभाल करता है उसकी संपत्ति पाने  की लालज में ।

आगे कहानी में अरुण सपना से बहुत ज्यादा प्यार करने लगता है और उसको पाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है। और कहानी में मोड़ तब आता है जब मामा ठाकुर सपना की शादी के लिये शंकर  बिहारी (गुलशन ग्रोवर) को तैयार करता है। कि उसकी सारी प्रोपर्टीज का कब्जा  कर लेगा। सपना पहले सोचती थी कि अरुण उससे फ्लर्ट करता है बाद में उसको पता चलता है कि अरुण उसको सच्चा प्यार करता है। और उसके लिये सुसायड करने को तैयार हो जाती है।

औऱ कहानी में वो मोड़ आता है कि मजूबरी में प्यार को पाने के अरुण मामा ठाकुर को मारने की कोशिश करता है और वह बच  जाता है। और इस तरह अरुण को मेंटल हास्पिटल भेज दिया जाता है। और इस तरह विक्रम की समझदारी से केस से परदा उठता है और अरुण को उसके सारे अपराधों से मुक्त किया जाता है। और अंत में अरुण के प्यार की जीत होती है।

इस फिल्म के सारे गाने सुपरहीट थे जो आज भी गुनगुनाये  जाते है। इस कुछ गानों के बोल है जो इस तरह है-

1.कितना हसीन चेहरा- जिसको कुमार शानू ने गाया था।

2.जीता हूँ जिसके लिये- कुमार शानू

3.मौका मिलेगा तो बताउँगा- उदित नारायण

4.एक ऐसी लड़की थी-कुमार शानू

आदि गाने थे जो आज भी नये लगते है  जिसको हम कह सकते है ओल्ड इज गोल्ड

आवार्ड– इस फिल्म मे सुनील शेट्टी को फिल्म फेयर बेस्ट सपोर्टिंग कलाकार 1994 का आवार्ड दिया गया था।

 

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